3 Real Stories जो आपको बाधाओं से लड़ना सिखा देंगी
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जीवन में कठिनाइयाँ आना स्वाभाविक है। कभी आर्थिक संकट, कभी सामाजिक भेदभाव, कभी शारीरिक चुनौती—हर व्यक्ति किसी न किसी मोड़ पर बाधाओं से टकराता है। फर्क सिर्फ इतना होता है कि कुछ लोग परिस्थितियों के आगे झुक जाते हैं, और कुछ लोग परिस्थितियों को ही झुका देते हैं।
आज मैं आपको तीन ऐसी सच्ची कहानियाँ (Real Stories) बताने जा रहा हूँ, जो आपको यह सिखाएँगी कि संघर्ष अंत नहीं होता, बल्कि सफलता की शुरुआत होता है।
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1️⃣ Dr. A.P.J. Abdul Kalam – अखबार बेचने वाला बच्चा बना भारत का राष्ट्रपति
तमिलनाडु के एक छोटे से गाँव रामेश्वरम में जन्मे डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का बचपन बेहद साधारण था। उनके पिता नाव चलाते थे और परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। घर चलाने में मदद के लिए कलाम साहब बचपन में अखबार बेचते थे।
चुनौतियाँ:
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आर्थिक तंगी
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संसाधनों की कमी
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बड़े शहरों और अंग्रेजी माध्यम के छात्रों से प्रतिस्पर्धा
लेकिन उन्होंने कभी हालात को अपनी पहचान नहीं बनने दिया। वे पढ़ाई में बेहद मेहनती थे और विज्ञान के प्रति उनका गहरा लगाव था।
उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और आगे चलकर भारत के मिसाइल प्रोग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी कारण उन्हें “मिसाइल मैन ऑफ इंडिया” कहा गया।
2002 में वे भारत के राष्ट्रपति बने।
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हमें क्या सीख मिलती है?
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गरीबी आपकी पहचान नहीं, आपकी परिस्थिति है।
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बड़ा सपना देखने के लिए बड़ा बैंक बैलेंस जरूरी नहीं।
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निरंतर प्रयास असंभव को संभव बना देता है।
डॉ. कलाम का जीवन हमें सिखाता है कि बाधाएँ केवल परीक्षा होती हैं, फैसला नहीं।
2️⃣ Arunima Sinha – एक पैर खोकर भी एवरेस्ट फतह
2011 में राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबॉल खिलाड़ी अरुणिमा सिन्हा के साथ एक भयानक हादसा हुआ। कुछ बदमाशों ने उन्हें चलती ट्रेन से फेंक दिया। वे कई घंटों तक रेलवे ट्रैक पर पड़ी रहीं।
जब उन्हें अस्पताल पहुँचाया गया, तो डॉक्टरों को उनकी जान बचाने के लिए उनका एक पैर काटना पड़ा।
सोचिए…
एक खिलाड़ी, जिसका जीवन खेल पर टिका था, अचानक एक पैर खो दे—उसके लिए यह कितना बड़ा मानसिक और शारीरिक आघात होगा।
लेकिन अरुणिमा ने हार नहीं मानी। अस्पताल के बेड पर ही उन्होंने निर्णय लिया कि वे दुनिया की सबसे ऊँची चोटी पर चढ़ेंगी।
उन्होंने कठोर प्रशिक्षण लिया और 2013 में वे माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की पहली महिला दिव्यांग पर्वतारोही बनीं।
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हमें क्या सीख मिलती है?
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शरीर से पहले मन हारता है।
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असंभव केवल एक शब्द है, सत्य नहीं।
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यदि लक्ष्य बड़ा हो, तो दर्द छोटा पड़ जाता है।
अरुणिमा की कहानी हमें बताती है कि परिस्थितियाँ हमें तोड़ नहीं सकतीं, जब तक हम खुद न टूटें।
3️⃣ Kalpana Chawla – छोटे शहर से अंतरिक्ष तक
हरियाणा के करनाल में जन्मी कल्पना चावला बचपन से ही आसमान को निहारती थीं। उस समय लड़कियों के लिए एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग चुनना आम बात नहीं थी।
चुनौतियाँ:
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सामाजिक सोच
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सीमित अवसर
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विदेशी धरती पर प्रतिस्पर्धा
लेकिन उन्होंने अपने सपनों को सीमाओं में नहीं बाँधा। वे अमेरिका गईं, उच्च शिक्षा प्राप्त की और नासा में अंतरिक्ष यात्री बनीं।
1997 में उन्होंने पहली बार अंतरिक्ष यात्रा की।
हालाँकि 2003 में कोलंबिया स्पेस शटल दुर्घटना में उनका निधन हो गया, लेकिन उनका जीवन करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा बन गया।
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हमें क्या सीख मिलती है?
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सपनों का कोई लिंग या सीमा नहीं होती।
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अगर आप आसमान छूना चाहते हैं, तो जमीन की आलोचनाओं को पीछे छोड़ना होगा।
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सफलता केवल उपलब्धि नहीं, प्रेरणा भी होती है।
कल्पना चावला ने दिखाया कि छोटे शहरों के बड़े सपने भी अंतरिक्ष तक पहुँच सकते हैं।
बाधाओं से लड़ने के 5 मूल मंत्र
इन तीनों सच्ची कहानियों से हमें कुछ साझा सूत्र मिलते हैं:
1. स्पष्ट लक्ष्य रखें
जब लक्ष्य साफ होता है, तो रास्ते की धूल परेशान नहीं करती।
2. मानसिक मजबूती विकसित करें
सबसे पहले खुद को समझाएँ कि “मैं कर सकता हूँ।”
3. असफलता को स्वीकार करें
असफलता अंत नहीं, दिशा बदलने का संकेत है।
4. सही मार्गदर्शन लें
गुरु, कोच या प्रेरक व्यक्तित्व से जुड़ें।
5. निरंतर प्रयास करें
लगातार छोटे कदम, बड़े परिणाम देते हैं।
निष्कर्ष
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, अरुणिमा सिन्हा और कल्पना चावला—तीनों की परिस्थितियाँ अलग थीं, लेकिन एक चीज समान थी: हार न मानने की जिद।
जीवन में जब भी आपको लगे कि रास्ता बंद हो गया है, इन कहानियों को याद कीजिए।
बाधाएँ हमें रोकने नहीं, मजबूत बनाने आती हैं।
संघर्ष हमें गिराने नहीं, गढ़ने आता है।
यदि आपके भीतर सपना है, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको रोक नहीं सकती—बस आपको खुद पर विश्वास बनाए रखना होगा।
आपका अगला कदम क्या है?
आज ही एक ऐसा लक्ष्य लिखिए, जो आपको डराता हो। फिर तय कीजिए कि आप उससे भागेंगे नहीं, बल्कि उसका सामना करेंगे।
क्योंकि इतिहास उन्हीं का बनता है, जो हालात से नहीं डरते—उन्हें बदल देते हैं। ✨
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